Wednesday, November 30, 2022

Navratri puja नवरात्री पूजा विधि एवं महत्व

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साल 2022 का शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर से शुरू होगा हिंदू धर्म में (Navratri Puja) नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां के 9 रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त व्रत भी रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान विधि- विधान से मां दुर्गा की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन अर्थात आश्विन शुक्ल की प्रतिपदा को घट की स्थापना होती है. नवरात्रि के दौरान प्रतिपदा तिथि, अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है.Navratri puja

नवरात्रि में मां देवी दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा -आराधना की जाती है.

  • 26 सितंबर –  मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है
  • 27 सितंबर -मां ब्रह्मचारिणी पूजा की जाती है
  • 28 सितंबर – मां चंद्रघंटा व मां कुष्मांडा की पूजा
  • 29 सितंबर- मां स्कंदमाता की पूजा
  • 30 सितंबर- मां कात्यायनी की पूजा
  • 01 अक्टूबर- मां कालरात्रि की पूजा
  • 02 अक्टूबर-मां महागौरी पूजा
  • 03 अक्टूबर- मां सिद्धिदात्री की पूजा
  • 04 अक्टूबर-दशमी नवरात्रि पारण/दुर्गा विसर्जन

 मां दुर्गा के हर वाहन का अपना अलग-अलग महत्व होता है. नवरात्रि में इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी .

जानें कैसे बदलती है माता ही सवारी Navratri Puja

नवरात्रि का आरंभ अगर सोमवार और रविवार से हो रहा हो तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं. नवरात्रि की शुरुआत शनिवार और मंगलवार से हो तो मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर होता है. नवरात्रि की शुरुआत जब बुधवार को होती है तो मां दुर्गा का वाहन नाव होता है. अगर नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार और शुक्रवार को होती है तो मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आती हैं. इस बार नवरात्रि की शुरुआत सोमवार से हो रही है तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी.

माता का हाथी पर आना बहुत ज्यादा शुभ  माना जाता है जो लोग सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करते हैं उन पर माता रानी की असीम कृपा होगी।

नवरात्रि तिथि मुहूर्त  Navratri Puja

घटस्थापना सुबह का मुहूर्त – प्रातः 06.17 से प्रातः 07.55
कुल अवधि: 01 घण्टा 38 मिनट
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त – प्रातः 11:54 से दोपहर 12:42
कुल अवधि – 48 मिनट

माता रानी की पूजा में लगने वाली पूजन सामग्री-Navratri puja

1-मां दुर्गा की नई प्रतिमा या फोटो

नवरात्रि में मां दुर्गा की नई प्रतिमा या फोटो स्थापित करके पूजन करना चाहिए।

2- कलश, जौ, मिट्टी और गंगा जल

कलश स्थापना के लिए मिट्टी के कलश और कसोरे या प्याला और आम की पत्तियां ले लेना चाहिए। इसके साथ ही एक कसोरे या प्याले में साफ मिट्टी, गाय का गोबर और गंगा मिला कर पहले दिन कलश स्थापना के साथ जौ भी बोया जाता है।

3- मां दुर्गा के वस्त्र, लाल चुनरी

मां दुर्गा को चढ़ाने के लिए वस्त्र और लाल चुनरी जरूर खरीदें। दुर्गा मां के वस्त्र लाल रंग के ही खरीदने चाहिए। इसके साथ ही श्रृगांर का सामान लाल रंग की चूड़िया और बिंदी भी दुर्गा मां को चढ़ाई जाती है।

4- पूजा की चौकी और आसन

मां की प्रतिमा की स्थापना के लिए एक साफ चौकी का भी जरूर इंतजाम कर लें। इस पर बिछाने के लिए लाल या पीले रंग का आसन होना चाहिए।

5- दुर्गा चालीसा और सप्तशती पाठ

नवरात्रि में मां दुर्गा के पूजन में नौ दिनों दुर्गा सप्तशती पाठ करने, दुर्गा चालीसा पढ़ने और मां दुर्गा के मंत्रों की पुस्तक भी जरूरी होती है।

6- हवन की सामग्री

नवरात्रि के पूजन का समापन नवमी के दिन हवन करके किया जाता है। इसके लिए हवन कुण्ड, हवन की लकड़ियां, हवन सामाग्री, शुद्ध घी का भी ले आना चाहिए।

7- इसके साथ ही मां दुर्गा के पूजन के लिए रोली, अक्षत, कपूर, माला, फूल, पान की पत्ता, सुपारी, कमल गट्टा, गुग्गुल लोबांग, अगरबत्ती,दीपक,रूई, लौंग, बताशा, मिठाई, कलावा, बंदनवार, नारियल आदि सामग्री की भी जरूरत पड़ती है।

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