नाराजगी शायरी | Narazgi Shayari in Hindi

Narazgi Shayari in Hindi

बहुत उदास है कोई शख्स तेरे जाने से
हो सके तो लौट के आजा किसी बहाने से
तू लाख खफा हो पर एक बार तो देख ले
कोई बिखर गया है तेरे रूठ जाने से

 

तुम भी चली आया करो कभी मनाने मुझको, यूं बेफज़ूल की नाराज़गी तुमसे, मेरी भी जान लेती है !!

 

मुझको छोङने की वजह तो बता देते..
मुझसे नाराज़ थे या..मुझ जैसे हज़ार थे..

वाकई हर चीज़ का अन्त एक न एक दिन हो ही जाता है, फिर चाहे वो शिकायतें हो, या नाराज़गी 

 

नाज़ हम उठाएं बेतकल्लुफ़ किसी और से रहो…
जाओ साहिब ये ईश्क के किस्से अब किसी और से कहो

न जाने किस  बात पे नाराज हैं वो हमसे !!     ख्वाबों में भी  मिलती है तो बात नहीं करती !!

 

नादान सी मोहब्बत है हमारी निभा लेना !! कभी तुम नाराज हुए तो हम झुक जाएंगे !! कभी हम नाराज रहे तो तुम सीने से लगा लेना

Narazgi Shayari in Urdu

नजाकत इश्क़ की भला वो क्या संमझेंगे ?      पलभर की गुफ़्तगू से जो मुद्दतों नाराज रहते है

 

वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए
कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए
मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े
पता चला मेरे पीछे वो उन्हे जोड़ कर रोए

 

ज़ुलफें मत बांधा करो तुम,
हवाए नाराज़ रहती हैं

 

कैसे ना हो इश्क, उनकी सादगी पर ए-खुदा,
ख़फा हैं हमसे, मगर करीब बैठे हैं…

 

बस एक यही बात उसकी मुझे अच्छी लगती है,
उदास कर के भी कहती है, तुम नाराज़ तो नहीं हो ना…

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