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Best Motivational Gulzar Shayari | गुलजार साब की बेहतरीन शायरी । शेरे ए गुलज़ार

Motivational Gulzar Shayari

गुलज़ार के नाम से मशहूर संपूर्ण सिंह कालरा का जन्म 18 अगस्त 1934 को हुआ था।

घुटन क्या चीज़ है ये पूछिए उस बच्चे से…
जो काम करता है “रोटी” के लिए
खिलौनों की दुकान पर

Motivational gulzar shayari

थोड़ा सा रफू करके देखिये ना…
फिर से नयी सी लगेगी
ज़िन्दगी ही तो है…

Motivational gulzar shayari 2

एक ना एक दिन हासिल कर ही लूंगा मंजिल..
“ठोकरे” ज़हर तो नहीं जो खाकर मर जाऊंगा

Motivational gulzar shayari 2

भीड़ काफी हुआ करती थी महफ़िल में मेरी..
फिर मैं “सच” बोलता गया और लोग उठते चले गए

Motivational gulzar shayari 2

Gulzar Shayari On Jindagi

इतना क्यों सिखाये जा रही हो ज़िन्दगी…
हमें कौन सी सदियां गुज़ारनी है यहाँ

Motivational gulzar shayari 2

Motivational gulzar shayari

ज़िन्दगी सारी उम्र संभालती रही दो पाँव पर
मौत ने आते ही कहा, मुझे चार कंधे चाहिए

Motivational gulzar shayari 2

आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

Motivational gulzar shayari 2

Gulzar Shayari

ज़िन्दगी ये तेरी खरोंचे है मुझ पर या
तू मुझे तराशने की कोशिश में है

Motivational gulzar shayari 2

कौन कहता हैं की हम झूठ नहीं बोलते
एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें  

Motivational gulzar shayari 2

मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता,
हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है।

Motivational gulzar shayari 2

Heart Touching Gulzar Shayari

इश्क़ की तलाश में
क्यों निकलते हो तुम,
इश्क़ खुद तलाश लेता है
जिसे बर्बाद करना होता है।

Motivational gulzar shayari 2

2 line gulzar shayari

सालों बाद मिले वो
गले लगाकर रोने लगे,
जाते वक्त जिसने कहा था
तुम्हारे जैसे हज़ार मिलेंगे.

Motivational gulzar shayari 2

  • गुलज़ार का जन्म संपूर्ण सिंह कालरा के रूप में हुआ था
  • उनका जन्म ब्रिटिश भारत के झेलम जिले के दीना में हुआ था जो अब पाकिस्तान में है
  • लेखक बनने से पहले, गुलज़ार ने मुंबई में एक कार मैकेनिक के रूप में काम किया
  • गुलज़ार ने बहुत छोटी उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था और लेखक होने के कारण उन्हें अक्सर उनके पिता द्वारा फटकार लगाई जाती थी
  • उन्होंने कलम नाम गुलज़ार दीनवी और बाद में बस गुलज़ारी लिया
  • विभाजन के बाद वे दिल्ली आए और बिमल रॉय के सहायक के रूप में काम किया
  • बाद में, उन्होंने फिल्म बंदिनी के लिए संगीत निर्देशक एसडी बर्मन के साथ एक गीतकार के रूप में अपना करियर शुरू किया
  • पहला गीत जिसे उन्होंने गीत दिया वह था “मोरा गोरा आंग लेले”। गुलजार ने आनंद, मेरे अपने, मौसम, माचिस, ओमकारा, कमीने, दिल से.., गुरु, स्लमडॉग मिलियनेयर, रावण, बंटी और बबली जैसी फिल्मों के गीतों के बोल दिए हैं।
  • उन्होंने आशीर्वाद, आनंद और खामोशी जैसी फिल्मों के लिए संवाद और पटकथा भी लिखी है
  • बतौर निर्देशक गुलजार की पहली फिल्म मेरे अपने थी जो एक बंगाली फिल्म अपंजन की रीमेक थी। बाद में उन्होंने परिचय और कोशिशो का निर्देशन किया
  • वर्ष 1988 में, गुलज़ार ने नसीरुद्दीन शाह अभिनीत एक टेलीविजन धारावाहिक मिर्ज़ा ग़ालिब का निर्देशन किया
    गुलज़ार की कोई भी फ़िल्म व्यावसायिक रूप से बहुत सफल नहीं रही
  • गुलजार ने जंगल बुक, एलिस इन वंडरलैंड, हैलो जिंदगी, गुच्चे और पोटली बाबा की सहित कई दूरदर्शन टीवी श्रृंखलाओं के लिए गीत और संवाद लिखे हैं।
  • अप्रैल 2013 में, गुलज़ार को असम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में नियुक्त किया गया था
  • गुलजार को 2004 में पद्म भूषण और 2002 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था
  • उन्होंने 20 फिल्मफेयर पुरस्कार जीते हैं
    “जय हो” गीत के लिए, गुलज़ार ने मोशन पिक्चर के लिए लिखित सर्वश्रेष्ठ गीत के लिए ग्रैमी अवार्ड की श्रेणी में ग्रैमी अवार्ड जीता।
  • भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार उन्हें वर्ष 2013 में प्रदान किया गया था।
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