50+ Kumar Vishwas Shayari | कुमार विश्वास की शायरी | Kumar Vishwas ki Kavita

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50+ कुमार विश्वास की शायरी | Kumar Vishwas ki Kavita | Kumar Vishwas Shayari

Kumar Vishwas Shayari डॉ. कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी के सक्रिय सदस्य थे । उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव अमेठी से AAP उम्मीदवार के रूप में लड़ा, लेकिन राहुल गांधी से हार गए। डॉ कुमार विश्वास एक प्रोफेसर, कवि और राजनीतिक नेता हैं। कुमार विश्वास एक ऐसे कवि हैं जिन्होंने ‘कवि सम्मेलन’ या काव्य समारोहों के रूढ़िवादी मानदंडों से परे जाकर इसे एक कलाकार का मंच बनाया। वह भारत के युवाओं के बीच एक आइकॉन बन गए हैं। डॉ कुमार विश्वास का जन्म 10 फरवरी को उत्तर प्रदेश के पिलखुवा में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुवा से प्राप्त की। उन्होंने राजपूताना रेजिमेंट इंटर कॉलेज, पिलखुवा से इंटर की पढ़ाई की। उन्होंने हिंदी साहित्य में परास्नातक और पीएचडी पूरी की। उन्होंने डॉ. मंजू शर्मा से शादी की। दंपति की दो बेटियां हैं। उनकी पत्नी हिन्दी साहित्य की व्याख्याता हैं।

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है,
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है.
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है,
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है

Kumar Vishwas Shayari

मेरा जो भी तर्जुबा है, तुम्हे बतला रहा हूँ मैं
कोई लब छु गया था तब, की अब तक गा रहा हूँ मैं
बिछुड़ के तुम से अब कैसे, जिया जाये बिना तडपे
जो मैं खुद ही नहीं समझा, वही समझा रहा हु मैं

Kumar Vishwas Shayari

मेरे जीने मरने में, तुम्हारा नाम आएगा
मैं सांस रोक लू फिर भी, यही इलज़ाम आएगा
हर एक धड़कन में जब तुम हो, तो फिर अपराध क्या मेरा
अगर राधा पुकारेंगी, तो घनश्याम आएगा

Kumar Vishwas Shayari

तुझ को गुरुर ए हुस्न है मुझ को सुरूर ए फ़न। दोनों को खुद पसंदगी की लत बुरी भी है।
तुझ में छुपा के खुद को मैं रख दूँ मग़र मुझे। कुछ रख के भूल जाने की आदत बुरी भी है।

Kumar Vishwas Shayari

Kumar Vishwas Ki Shayari

कहीं पर जग लिए तुम बिन, कहीं पर सो लिए तुम बिन. भरी महफिल में भी अक्सर,
अकेले हो लिए तुम बिन ये पिछले चंद वर्षों की कमाई साथ है अपने कभी तो हंस लिए तुम बिन, कभी तो रो लिए तुम बिन

Kumar Vishwas Shayari

यह चादर सुख की मोल क्यू, सदा छोटी बनाता है. सीरा कोई भी थामो, दूसरा खुद छुट जाता है.
तुम्हारे साथ था तो मैं, जमाने भर में रुसवा था. मगर अब तुम नहीं हो तो, ज़माना साथ गाता है

Kumar Vishwas Shayari

Kumar Vishwas Shayari

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा

Kumar Vishwas Shayari

Kumar Vishwas