Government Schemes: पशुपालन-डेयरी बिजनेस से ऐसे करें मुनाफा, ये योजनाएं करेंगी आपकी मदद – ABP न्यूज़

By: ABP Live | Updated at : 15 Jan 2023 10:07 AM (IST)

पशुपालन-डेयरी व्यवसाय में किसान-पशुपालकों को आर्थिक तकनीकी मदद देने वाली योजनाएं ( Image Source : Twitter- @Dept_of_AHD )
Animal Husbandry Schemes: भारत एक कृषि प्रधान देश है. यहां की 60% आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती किसानी पर निर्भर है. जब हम कहते हैं खेती-किसानी तो इसमें फसल उत्पादन बागवानी और वानिकी के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी व्यवसाय, मुर्गी पालन और मछली पालन भी शामिल हो जाता है. आज किसान खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आय कमाने के लिए इन पशुपालन गतिविधियों जुड़ते जा रहे हैं. देश विदेश में बढ़ती दूध अंडे मांस की डिमांड ने किसानों से लेकर युवा और पेशेवरों को इन कामों की तरफ आकर्षित किया है.
अब गांव के साथ-साथ शहरों में भी लोग इन गतिविधियों की तरफ बढ़ रहे हैं. अच्छी बात यह है कि केंद्र सरकार भी इन कामों में किसानों से लेकर आम जनता को सहयोग प्रदान करती है. इसके लिए सरकार ने तमाम योजनाएं भी चलाई हैं.
आज हम आपको उन्हीं योजनाओं के बारे में बताएंगे, जिनसे जुड़कर अपना ना सिर्फ पशुपालन, डेयरी फार्मिंग, पोल्ट्री फार्मिंग और फिश फार्मिंग का खर्च आधा कर सकते हैं, बल्कि काफी अच्छा मुनाफा भी ले सकते हैं.
राष्ट्रीय गोकुल मिशन

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स्वदेशी का नारा बुलंद करते हुए देश में देसी उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस बीच सरकार ने स्वदेशी पशुधन की क्षमता को भी समझा है और मवेशियों की देसी नस्लों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत की है.
इस योजना के जरिए ना सिर्फ देसी पशुओं के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है, बल्कि देश में बढ़ती दूध की मांग को देखते हुए छोटे किसानों को इस योजना से जोड़ा जा रहा है. यदि आप भी देसी नस्लों को पालकर अच्छी आमदनी अर्जित करना चाहते हैं तो राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं.
डेयरी विकास राष्ट्रीय कार्यक्रम
दूध और दूध से बने उत्पादों की बढ़ती डिमांड के बीच डेयरी फार्मिंग का बिजनेस आसमान छू रहा है. अब किसानों के साथ-साथ शहरों के युवा-पेशेवर भी डेयरी बिजनेस से जुड़ते जा रहे हैं. इस काम में किसानों की मदद के लिए सरकार ने डेयरी विकास राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की है.
इस योजना के तहत डेयरी फार्मिंग करने वाले किसानों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इतना ही नहीं, इस स्कीम के तहत दूध की क्वालिटी को बेहतर बनाना, दूध खरीद को बढ़ावा देना और  दूध उत्पादन करने वाले पशुओं का नस्ल सुधार करना भी शामिल है.
इन सभी कामों के लिए किसानों को ट्रेनिंग और तकनीकी गाइडेंस भी दी जाती है. इस काम में जिला पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, दूध उत्पादक कंपनियां, राज्य दुग्ध संघ और जिला दुग्ध संघ भी किसान और पशुपालकों की मदद करते हैं. यदि आप भी इस स्कीम का लाभ लेना चाहते हैं तो अपने जिले के पशुपालन विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं.
राष्ट्रीय पशुधन मिशन
केंद्रीय मत्स्य पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने साल 2014 में राष्ट्रीय पशुधन मिशन की शुरुआत की थी. आज लाखों किसानों को इस योजना का लाभ मिल सकता है. इस योजना के जरिए गाय-भैंस जैसे बड़े दुधारू मवेशियों से लेकर बकरी, सूअर, खरगोश, भेड़ और मुर्गी पालन को बढ़ावा दिया जाता है.
इस योजना में पशु चारा आधारित उद्यमों को भी सपोर्ट किया जाता है. इस योजना का प्रमुख उद्देश्य पशुपालन के क्षेत्र में नस्ल सुधार के साथ-साथ पशुओं की उत्पादकता को बेहतर बनाना है, ताकि किसानों और पेशेवरों के रोजगार का सृजन हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले.
बता दें कि इस योजना के तहत तीन उप मिशन भी शामिल हैं, जिसमें पशुधन और कुक्कुट के नस्ल विकास पर उप मिशन, चारा एवं चारा विकास पर उप मिशन, अनुसंधान और विकास पशुधन बीमा विस्तार और नवाचार पर उप मिशन आदि.
पशुधन बीमा योजना
जिस तरह खेती में किसानों को तमाम अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है. उसी प्रकार पशुपालन भी एक अनिश्चितताओं का बिजनेस है. छोटे पशु हजारों की कीमत में आते हैं तो गाय भैंस जैसे बड़े पशुओं के बिजनेस में लाखों रुपए का निवेश करना पड़ता है.
इसी के विपरीत कई बार पशु बीमार हो जाते हैं या बीमारी, मौसम, दुर्घटना के कारण पशुओं की अचानक मृत्यु हो जाती है तो किसान या पशुपालक आर्थिक संकट में फंस जाते हैं. ऐसी परिस्थितियों से किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हुए पशुधन बीमा योजना चलाई जा रही है.
इस योजना के तहत दुधारू मवेशी यह पशुधन की श्रेणी में आने वाले तमाम पशुओं का बीमा किया जाता है. जिसमें बीमा की राशि पर 50 से 70% तक अनुदान दिया जाता है. इस योजना में 50,000 रुपये तक के क्लेम देने का नियम है.
आज पशुओं पर लंपी, बर्ड फ्लू जैसी बीमारियां हावी हो रही है, जिससे पशुधन के साथ-साथ पशुपालकों को भी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है. ऐसे में पशुधन बीमा योजना बेहद मददगार साबित हो रहा है.
पशु किसान क्रेडिट कार्ड
किसान क्रेडिट कार्ड का नाम तो आपने सुना ही होगा. पशुपालकों के लिए भी सरकार ने इसे अपग्रेड करके पशु किसान क्रेडिट कार्ड बनाया है. इस कार्ड के जरिए मछली पालन, मुर्गी पालन, भेड़ पालन, बकरी पालन, गाय और भैंस पालन करने वाले पशुपालकों को सस्ते दरों पर लोन दिया जाता है, ताकि पशुपालन से जुड़ी छोटी-मोटी आवश्यकता और खर्चों को पूरा किया जा सके.
पशु किसान क्रेडिट कार्ड पर पशुपालकों को 7% ब्याज दर पर 1,80,000 रुपये का बिना गारंटी का लोन दिया जाता है, जिसकी ब्याज राशि में सरकार 3% तक छूट भी देती है. पशुपालक चाहे तो पशु किसान क्रेडिट कार्ड पर भैंस के लिए 60,249 रुपये और गाय के लिए 40,783 रुपये का लोन ले सकता है.
आपको बता दें कि पशु किसान क्रेडिट कार्ड को सीधा एटीएम मशीन से भी इस्तेमाल किया जा सकता है और इससे पैसे निकाल कर  पशुपालन आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं. पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेने के लिए नाबार्ड, वित्तीय संस्था या किसी भी बैंक की शाखा में संपर्क कर सकते हैं. 
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना
देश में पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन के बाद अब मछली पालन भी बड़ा बिजनेस बनकर उभर रहा है. पहले यह सिर्फ मछुआरों का काम होता था, जो नदी और समुद्र से मछली इकट्ठा करके देश भर में निर्यात करते थे, लेकिन अब गांव-गांव में तालाब बनाकर मछली पालन किया जा रहा है.
इस काम में अब केंद्र सरकार भी किसानों और ग्रामीणों की मदद कर रही है. बता दें कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली पालन के लिए लोन और निशुल्क प्रशिक्षण की सुविधा दी जाती है. इसके साथ साथ एससी-एसटी वर्ग के लाभार्थियों और महिला लाभार्थियों को 60% अनुदान भी दिया जाता है.
अन्य श्रेणी के लोगों को 40% सब्सिडी मिलती है, जिससे सस्ती दरों पर मछली पालन करके अच्छा मुनाफा कमा सकें. इन दिनों प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सरकार मछली पालन की आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है.
इस योजना का लाभ लेने के लिए अपने जिले के पशुपालन विभाग में संपर्क कर सकते हैं या फिर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते हैं
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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