Agriculture Scheme: हरियाणा के किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही ये 5 योजनाएं, आप – ABP न्यूज़

By: ABP Live | Updated at : 05 Jan 2023 10:56 AM (IST)

हरियाणा के किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही ये 5 योजनाएं ( Image Source : Google )
Haryana Farmers Scheme: भारत एक कृषि प्रधान देश है. यहां की 60 फीसदी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती-किसानी पर निर्भर है. ये आबादी किसानों की है, जो दिन रात मेहनत करके फसलों से उत्पादन लेते हैं. इन किसानों के सहयोग के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और देश की कई कृषि संस्थान काम कर रहे हैं. केंद्र सरकार ने कई कृषि योजनाएं चलाई हैं, जो देश के हर किसानों को आर्थिक और तकनीकी तौर पर लाभान्वित करती हैं. इनके अलावा भी राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर तमाम योजनाएं लाती है.
हरियाणा भी एक कृषि प्रधान राज्य हैं, जहां केंद्र की कृषि योजनाओं के अलावा राज्य सरकार भी अपनी ओर से किसानों को योजनाओं का लाभ दे रही है. यदि आप भी हरियाणा के किसान हैं. वहां खेती-किसानी करते हैं तो आप भी इन 5 सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं.
कृषि यंत्र अनुदान योजना
किसान सिर्फ खेती तक ही सीमित ना रहे, बल्कि आज के आधुनिक दौर में तकनीक और मशीनीकरण को भी अपनाएं. इसके लिए हरियाणा सरकार ने कृषि यंत्र अनुदान योजना चलाई है, जिसके तहत 55 से अधिक तक के कृषि यंत्र, उपकरण, ट्रैक्टर आदि की खरीद पर सब्सिडी दी जाती है. इसका फायदा छोटे किसानों को भी मिलता है, क्योंकि पैसों की तंगी के कारण, जो किसान महंगे मशीनें नहीं खरीद पाते थे.
अब वो सब्सिडी का लाभ लेकर आसानी से खरीद लेते हैं. इससे खेती की लागत कम होती है, उत्पादन भी बेहतर मिलने लगता है.यदि आप भी कृषि यंत्र अनुदान योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो सरकार की ऑफिशियल साइट https://agricoop.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

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मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना
पिछले कई सालों में जलवायु परिवर्तन का बुरा असर खेती पर देखने को मिला है. मौसम की मार से फसलें बर्बाद हो जाती है और किसान आर्थिक संकट में आ जाते हैं. इस समस्या के सामधान के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई है, जिसमें रबी, खरीफ और बागवानी फसलों की बीमा करवाके निश्चिंत होकर खेती कर सकते हैं. ऐसी ही एक योजना हरियाणा की सरकार ने भी चलाई है, जिसका नाम है मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना.
राज्य में बढ़ते बागवानी फसलों के रकबे के मद्देनजर इस योजना के तहत 21 फसलों को शामिल किया गया है. बागवानी फसलों का बीमा लेने पर किसान को 750 रुपये से लेकर 1000 रुपये काा बीमा प्रीमियम अदा करना होता है. यदि फसल में प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान हो जाए तो सरकार 30,000 से 40,000 रुपये का बीमा क्लेम देती है.
भावांतर भरपाई योजना
किसान खेतों में कड़ी मेहनत करके फसलों का उत्पादन लेते हैं, लेकिन कई बार बाजार में उनकी उपज को सही दाम नहीं मिलता, जिसके चलते नुकसान भी उठाना पड़ जाता है.  ऐसे में हरियाणा सरकार की भावांतर भरपाई योजना ने किसानों को आर्थिक संबल दिया है. इस स्कीम का प्रमुख उद्देश्य ही किसानों को उपज ही सही कीमत दिलवाना है.
यदि बाजार में आपकी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों पर खरीदा जा गया है तो नियमों और शर्तों के आधार पर https://hortharyana.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं, एमएसपी के आधार पर फसल के दाम तय होने के 15 दिन के अंदर किसानों को भावांतर भरपाई कर दी जाती है.
मेरा पानी मेरी विरासत योजना
धान एक पारंपरिक फसल है, जिसकी खेती में पानी की काफी ज्यादा खपत होती है. कई इलाकों में तो भूजल स्तर गिरता जा रहा है, जिससे धान का उत्पादन लेना भी मुश्किल हो गया है. यही वजह है कि अब हरियाणा और तमाम सरकारें धान की खेती को हतोत्साहित कर रही हैं.
किसानों को सिर्फ सिंचित इलाकों में धान उगाने की सलाह दी जा रही है, लेकिन जो किसान धान की जगह दूसरी खेती करते हैं, उन्हें हरियाणा सरकार 7,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान देती है. इस वैकल्पिक खेती योजना भी नाम दिया गया है.
प्राणवायु देवता योजना
देश में किसानों को एक तबका गरीब, मजदूर और भूमिहीन की श्रेणी में भी आता है. ये देश की कृषि अर्थव्यवस्था में अहम रोल अदा करते हैं. इसके बावजूद इन किसानों के लिए देश में योजनाएं कम ही हैं. वहीं हरियाणा सरकार ने इन किसानों के लिए प्राण वायु देवता योजना चलाई है, जिसके तहत 75 साल या उससे अधिक उम्र के पेड़ों की देखभाल करने वाले लोगों को 2,500 रुपये की सालाना पेंशन दी जाती है.
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये पेड़ कटने से बच जाते हैं और इसकी देखभाल करने वाले आर्थिक संबल मिल जाता है. इस स्कीम से प्रोत्साहित होकर लोग अब ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र को पेड़ों से भी कवर कर रहे हैं.
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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