बिहार: 2 महीने से प्रदर्शन कर रहे किसान क्यों हो गए उग्र? यहां जानें घटना की पूरी सच्चाई – TV9 Bharatvarsh

TV9 Bharatvarsh | Edited By:
Updated on: Jan 12, 2023 | 3:00 PM
बिहार के बक्सर जिले में भूमि अधिग्रहण मुआवजे का विरोध कर रहे किसानों का एक समूह बुधवार सुबह हिंसक हो गया. इसके बाद गुस्साए भीड़ ने नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे पुलिस अधिकारियों पर हमला कर दिया. इससे मौके पर अफरातफरी मच गई. जानकारी के मुताबिक, किसानों ने पुलिस और पावर प्लांट पर पथराव किया. साथ ही उग्र भीड़ ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की और एक गाड़ी में आग लगा दी.
कृषि जागरण के मुताबिक, किसानों ने यातायात बाधित करने के लिए एसजेवीएन संयंत्र के मुख्य द्वार पर टायरों में आग लगा दी. वहीं, पुलिस ने हवा में फायरिंग कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन किसानों ने अपना विरोध जारी रखा. फिलहाल, घटनास्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस बल बावजूद है. कहा जा रहा है कि किसानों ने कथित रूप से ईंटों से से हमला किया था, जिससे चार पुलिसकर्मी घायल हो गए.
पुलिस की कार्रवाई वीडियो में कैद हो गई
वहीं, किसानों ने दावा किया कि मंगलवार को वे राज्य के स्वामित्व वाली बिजली कंपनी द्वारा अधिग्रहित की जा रही कृषि भूमि के मौजूदा मूल्यों/कीमत की मांग करते हुए संयंत्र के बंद मुख्य द्वार के सामने प्रदर्शन कर रहे थे. तभी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बनारपुर गांव में मंगलवार को बड़ी संख्या में पुलिस बल ने कथित तौर पर कुछ किसानों के घरों को तोड़ दिया और उन्हें डंडों और जूतों से पीटा. साथ ही पुलिस ने प्रदर्शनकारी नेता नरेंद्र तिवारी समेत चार लोगों को हिरासत में लिया. किसानों ने पुलिस के ऊपर महिलाओं के साथ मारपीट करने और उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है. पुलिस की कार्रवाई वीडियो में कैद हो गई और तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गई.
क्या है पूरा मामला
दरअसल,बक्सर जिले के चौसा में सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) के थर्मल पावर प्लांट से जुड़ी पाइप लाइन और रेलवे लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण में उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर किसान पिछले 85 दिन से धरने पर बैठे हैं. इस पॉवर प्लांट के लिए किसानों का भूमि अधिग्रहण 2010-11 से पहले ही किया गया था. उस समय किसानों को 2010-11 के अनुसार मुआवजे का भुगतान किया गया था. लेकिन कंपनी ने जब 2022 में किसानों की जमीन अधिग्रहण करने की करवाई शुरू की तो किसान वर्तमान दर के हिसाब से मुआवजा मांगने लगे. जबकि कंपनी पुराने दर पर ही मुआवजा देकर जमीन अधिग्रहण कर रही है. यही वजह है कि पुलिस और किसानों के बीच झड़प हो गई.
उनके परिवार के सदस्यों को क्यों पीटा
बक्सर जिला प्रशासन के मुताबिक, 14 गांवों की 137.0077 एकड़ जमीन पर रेल कॉरिडोर बनाया जाएगा. सरकार 309 चौसा किसानों से 55.445 हेक्टेयर जमीन खरीदेगी. एडीजी (मुख्यालय) जितेंद्र सिंह गंगवार के अनुसार, स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सहाबाद रेंज के डीआईजी नवीन कुमार झा सहित पुलिस अधिकारियों का एक दल घटनास्थल पर पहुंच गए हैं. गंगवार ने बताया कि घटना मुआवजे से संबंधित बताई जा रही है. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि पुलिस ने किसानों के घरों पर छापा क्यों मारा और उनके परिवार के सदस्यों को क्यों पीटा.
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