इस राज्य में एक साल के अंदर 1023 किसानों ने दी जान, जानिए आत्महत्या की असली वजह – TV9 Bharatvarsh

TV9 Bharatvarsh | Edited By:
Updated on: Jan 16, 2023 | 3:21 PM
पिछले साल बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में भारी बारिश हुई, जिससे कई इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया. इससे खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं. ऐसे में किसान कर्ज में डूब गए. वहीं, मीडिया रिपोर्ट के हवाले से खबर है कि साल 2022 में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में एक हजार से अधिक किसानों ने आत्महत्याएं की हैं, जो एक साल पहले मुकाबले काफी अधिक है. संभागीय आयुक्त कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में 2022 में 1,023 किसानों ने आत्महत्या की, जो पिछले वर्ष 887 थी.
एनडी टीवी के मुताबिक, साल 2001 और 2010 के बीच, वर्ष 2006 में सबसे अधिक 379 किसान आत्महत्याएं दर्ज की गईं. इसी तरह वर्ष 2011-2020 के बीच साल 2015 में सबसे अधिक 1,133 किसान आत्महत्याएं दर्ज की गईं. एक अधिकारी ने कहा कि 2001 के बाद से आत्महत्या करने वाले 10,431 किसानों में से 7,605 को सरकारी मानदंडों के अनुसार सहायता मिली थी. कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में, इस क्षेत्र में कुछ वर्षों में सूखे जैसी स्थिति और अन्य में अत्यधिक बारिश देखी गई है, जिसने फसल उत्पादकों की कठिनाइयों को बढ़ा दिया है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सिंचाई नेटवर्क का भी पूरी क्षमता से उपयोग नहीं किया जा रहा है.
घटनाएं दिसंबर और जून के बीच संख्या बढ़ रही हैं
जिला प्रशासन के सहयोग से उस्मानाबाद में किसानों के लिए एक परामर्श केंद्र चलाने वाले विनायक हेगाना ने किसान आत्महत्याओं का विश्लेषण करते हुए छोटे से छोटे स्तर पर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर पर नीतियां तैयार की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में सुधार किया जा सकता है. इससे पहले जुलाई और अक्टूबर के बीच सबसे ज्यादा किसान आत्महत्याएं दर्ज की गई थीं, लेकिन पैटर्न बदल गया है. उन्होंने कहा कि अब किसानों की आत्महत्या की घटनाएं दिसंबर और जून के बीच संख्या बढ़ रही हैं.
उनकी फसल की उपज को भी अच्छा रिटर्न मिले
संख्या पर अंकुश लगाने की नीतियों पर हेगाना ने कहा कि इन नीतियों में खामियां ढूंढना और उन्हें बेहतर बनाना एक सतत प्रक्रिया होनी चाहिए. साथ ही ऐसे लोगों का एक समूह होना चाहिए जो इस पर काम कर सकें. संपर्क किए जाने पर, महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने कहा कि हालांकि किसानों के लिए कई बार कर्जमाफी हुई है, लेकिन आंकड़े (आत्महत्या के) बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब हम उनका कर्ज माफ करते हैं तो हमें यह भी देखना होता है कि उनकी फसल की उपज को भी अच्छा रिटर्न मिले. दानवे ने उच्च दरों पर बेचे जा रहे घटिया बीजों और उर्वरकों की चिंताओं पर भी बोला. उन्होंने कहा कि ये कृषि क्षेत्र के लिए हानिकारक हैं. इन कृषि संसाधनों की गुणवत्ता निशान तक होनी चाहिए, जो सबसे महत्वपूर्ण है.
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